विश्वज्ञानकोष

विश्वज्ञानकोष, विश्वकोष या ज्ञानकोष (encyclopedia, या, encyclopædia) ऐसे पुस्तक को कहते हैं जिसमें विश्वभर की तरह तरह की जानने लायक बातों को समावेश होता है। इस किस्म की बाते अनंत है, इस लिये किसी भी विश्वज्ञानकोष को कभी पूरा हुआ घोषित नहीं किया जा सकता। विश्वज्ञानकोष में सभी विषयों के लेख हो सकते हैं किन्तु एक विषय वाले विश्वकोश भी होते हैं। विश्वकोष में उपविषय (टापिक), उस भाषा के वर्णक्रम के अनुसार व्यवस्थित किये गये होते हैं।

पहले विश्वकोष एक या अनेक खण्डों में पुस्तक के रूप में ही आते थे। कम्प्यूटर के प्रादुर्भाव से अब सीडी आदि के रूप में भी तरह-तरह के विश्वकोष उपलब्ध हैं। अनेक विश्वकोश अन्तरजाल पर 'ऑनलाइन' भी उपलब्ध हैं।

ऐतिहासिक दृष्टि से विश्वकोषों का विकास शब्दकोषों (डिकशनरी) से हुआ है। ज्ञान के विकास के साथ ऐसा अनुभव हुआ कि शब्दों का अर्थ एवं उनकी परिभाषा दे देने मात्र से उन विषयों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं मिलती, तो विश्वकोषों का अबिर्भाव हुआ। आज भी किसी विषय को समर्पित विश्वकोष को शब्दकोष भी कहा जाता है; जैसे 'सूक्ष्मजीवविज्ञान का शब्दकोश' आदि।


अनुक्रम

[संपादित करें] भारत में विश्वकोषों की परम्परा

भारतीय वाङमय में संदर्भग्रंथों- कोश, अनुक्रमणिका, निबंध, ज्ञानसंकलन आदि की परंपरा बहुत पुरानी है। भारतीय भाषाओं में सबसे पहला आधुनिक विश्वकोश श्री नगेंद्र नाथ बसु द्वारा सन्‌ १९११ में संपादित बाँगला विश्वकोश था। बाद में १९१६-३२ के दौरान २५ भागों में उसका हिंदी रूपांतर प्रस्तुत किया गया। मराठी विश्वकोश की रचना २३ खंडों में श्रीधर व्यकंटेश केतकर द्वारा की गई।

स्वराज्य प्राप्ति के बाद भारतीय विद्वानों का घ्यान आधुनिक भाषाओं के साहित्यों के सभी अंगों को पूरा करने की ओर गया और आधुनिक भारतीय भाषाओं में विश्वकोश निर्माण का श्रीगणेश हुआ। इसी क्रम में नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ने सन्‌ १९५४ में हिंदी में मौलिक तथा प्रामाणिक विश्वकोश के प्रकाशन का प्रस्ताव भारत सरकार के सम्मुख रखा। इसके लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया और उसकी पहली बैठक ११ फरवरी १९५६ में हुई और हिंदी विश्वकोश के निर्माण का कार्य जनवरी १९५७ में प्रांरभ हुआ। सन्‌ १९७० तक १२ खंडों में इस विश्वकोश का प्रकाशन कार्य पूरा किया गया। सन्‌ १९७० में विश्वकोश के प्रथमतीन खंड अनुपलब्ध हो गए। इसके नवीन तथा परिवर्धित संस्करण का प्रकाशन किया गया। राजभाषा हिंदी के स्वर्णजयंती वर्ष में राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय) तथा मानवसंसाधन विकास मंत्रालय ने केन्द्रीय हिंदी संस्थान, आगरा को यह उत्तरदायित्व सौंपा कि हिंदी विश्वकोश इंटरनेट पर पर प्रस्तुत किया जाए। तदनुसार केन्द्रीय हिंदी संस्थान,आगरा तथा इलेक्ट्रॉनिक अनुसंधान एवं विकास केंद्र, नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त वित्तपोषण से हिंदी विश्वकोश को इंटरनेट पर प्रस्तुत करने का कार्य अप्रैल २००० में प्रारम्भ हुआ।

[संपादित करें] इक्कीसवी शताब्दी के विश्वकोष

विश्वकोषों की संरचना कम्प्यूटर के लिये विशेष रूप से उपयुक्त है। इसी लिये अधिकांश विश्वकोष बूसवीं सदी के अन्त तक कम्प्यूटरों के लिये उपयुक्त फार्मट (स्वरूप) में आ गये हैं। सीडी-रोम आदि में उपलब्ध विश्वकोषॉम के निम्नलिखित लाभ हैं:

  • सस्ते में तैयार किये जा सकते हैं।
  • एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में सुविधा (पोर्टेबल)
  • इनमें कोई शब्द या लेख खोजने की सुविधा भी पुस्तक-रूप विश्वकोषों की तुलना में बहुत उन्नत एवं सरल होती है।
  • इनमें ऐसी विशेषताएँ एवं खूबियाँ होती हैं जिन्हे पुस्तकों में देना सम्भव नहीं है। जैसे - एनिमेशन, श्रव्य (आडियो), विडियो, हाइपलिंकिंग आदि।
  • इनकी सामग्री समय के साथ आसानी से परिवर्तनशील (dynamic) है। उदाहरण के लिये विकिपीडिया में नये से नये विषय पर भी शीघ्र

लेख प्रकट हो सकता है। जबकि पुस्तक रूपी विश्वकोष में कोई नया विषय जोडने या कोई सुधार करने के लिये उसके अगले संस्करण तक प्रतीक्षा करनी पडती है।

[संपादित करें] यह भी देखें



[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ


Protezy KOPERTY Wina Bajki gry słowniczek Muzyka Nieruchomości Wrocław dźwirzyno opakowania fryzury Teksty mp3 Bilety Radio disco polo obrazy olejne kick koparki Bułgaria wczasy Karaoke expekt COOLsurf